फिल्टर का पानी सेहत के लिए कितना है अच्छा डॉ अर्चिता महाजन*

*फिल्टर का पानी सेहत के लिए कितना है अच्छा डॉ अर्चिता महाजन*
वॉइस ऑफ हिमाचल मीडिया ब्यूरो रिपोर्ट :- चंबा कमल देव
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रिशन डाइटिशन ट्रेंड योगा टीचर एंड होम्योपैथी फार्मासिस्ट नॉमिनेटेड फॉर नेशनल यूथ अवार्ड एंड पदम भूषण ने बताया कि जितना फायदेमंद है आरओ का पानी उतना ही नुकसंदाय भी है
पानी शुद्ध करने के लिए रिवर्स ऑस्मोसिस (आरओ) वॉटर प्यूरिफायर लगवाना अब एक आम चलन है।ऐसा इसलिए भी है कि महानगरों में पानी पीने लायक नहीं है क्युकी इसमें क्या प्रकार के पदार्थ होते है जो आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकते है जैसे आर्सेनिक, फ्लोराइड या नाइट्रेट लीड परंतु क्या आप जानते हैं कि ro का पानी जहा सारे कैमिकल और अन्य नुकसानदाय पदार्थ को फिल्टर करता है वही इसके पानी से भी कई बीमारियों का खतरा है? आरओ यानी रिवर्स ऑस्मोसिस में गंदगी के साथ वह मिनिरल्स भी निकल जाते हैं, जो हमारे शरीर के लिए बेहद जरूरी हैं। इनकी कमी से हड्डी, लिवर, किडनी, बीपी और दिल की बीमारी तक हो सकती है।
अगर एक लीटर पानी में 300 मिलीग्राम से 600 मिलीग्राम तक TDS हो तो उसे पीने योग्य माना जाता है. हालांकि अगर एक लीटर पानी में TDS की मात्रा 900 मिलीग्राम से ज्यादा है तो वो पानी पीने योग्य नहीं माना जाता है.लेकिन ये मात्रा 250 मिलीग्राम से कम नहीं होनी चाहिए क्योंकि, इससे पानी में मौजूद खनिज आपके शरीर में नहीं पहुंच पाते.वहीं कई RO कंपनियां पानी को मीठा करने के लिए उसका टीडीएस घटा देते हैं. 65 से 95 टीडीएस होने पर पानी मीठा तो हो जाता है लेकिन उसमें से कई जरूरी मिनरल्स (Minerals) भी निकल चुके होते हैं, अधिकतर लोग इससे होने वाले नुक्सान को समझ नहीं पाते हैं. इसका सबसे बड़ा नुकसान शरीर की हड्डियों को झेलना पड़ता है. कुछ समय बाद ज्वाइंट्स या हाथ-पैरों में दर्द होने लगता है. एक्सपर्ट भी कहते हैं कि आपको पानी का टीडीएस लेवल 350 पर रखना चाहिए.अगर आप लगातार आरओ का पानी पी रहे हैं तो सावधान हो जाएं, ये गंभीर बीमारियां दे सकती हैं दस्तक जैसे हृदय संबधित बीमारियां थकान महसूस होना मानसिक कमजोरी मासपेशियों में दर्द सिरदर्द आदि
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रिशन डाइटिशन ट्रेंड योगा टीचर एंड होम्योपैथी फार्मासिस्ट नॉमिनेटेड फॉर नेशनल यूथ अवार्ड एंड पदम भूषण 9463819002



