Voice of Himachal Media and Kala Manchअंबालाउनाकठुआकाँगड़ाकिन्नौरकुल्लूगैजेट्सचंबाछत्तीसगढ़जम्मूजम्मू कश्मीरडायटिशियन और न्यूट्रिशनदिल्लीदेशधर्मशालानूरपुरन्यूट्रिशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्टपंजाबपरवाणूबद्दीबिलासपुरमंडीराजनीतिरिवालसरलाइफस्टाइललाहौल और स्पीतीविदेशशिमलाश्रीनगरसरकाघाटसंस्कृतिसिरमौरसुंदरनगरसोलनहमीरपुरहरियाणाहिमाचल प्रदेशहिमाचल संस्कृति

बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी बीपी की दवाई ना खाएं, डायबिटीज 2 का खतरा हो सकता है, डॉ अर्चिता महाजन*

मोटापा और फैमिली हिस्ट्री वाले बिना डॉक्टर की सलाह के बीपी की दवाई ना ले*

hi*बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी बीपी की दवाई ना खाएं, डायबिटीज 2 का खतरा हो सकता है, डॉ अर्चिता महाजन*

*मोटापा और फैमिली हिस्ट्री वाले बिना डॉक्टर की सलाह के बीपी की दवाई ना ले*

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि कुछ खास ब्लड प्रेशर की दवाएं (जैसे बीटा-ब्लॉकर्स और थियाज़ाइड मूत्रवर्धक/डाययुरेटिक्स) लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर रक्त शर्करा (शुगर) का स्तर बढ़ा सकती हैं। हालाँकि, अन्य दवाएं (जैसे ACE इनहिबिटर्स और ARBs) शुगर से बचाव में मदद करती हैं।बीपी की दवाओं और शुगर के बीच के संबंध को समझने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें:प्रभावित करने वाली दवाएं: थियाज़ाइड (जैसे हाइड्रोक्लोरोथियाज़ाइड) और बीटा-ब्लॉकर्स (जैसे मेटोप्रोलोल) शरीर में इंसुलिन के असर को कम कर सकते हैं, जिससे शुगर बढ़ सकती है।सुरक्षित विकल्प: कुछ दवाएं जैसे ACE इनहिबिटर्स (जैसे रेमिप्रिल) और ARBs (जैसे लोसार्टन) शुगर के मरीजों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हैं और किडनी को भी सुरक्षित रखती हैं।डॉक्टर की सलाह: जिन लोगों को पहले से शुगर होने का खतरा होता है (जैसे मोटापा या आनुवांशिक कारण), उन्हें डॉक्टर इन संभावित दुष्प्रभावों (side-effects) को ध्यान में रखकर ही दवा लिखते हैं।यदि आप बीपी की कोई दवा ले रहे हैं और शुगर के स्तर को लेकर चिंतित हैं, तो अपनी दवा में खुद बदलाव न करें। आप अपने लक्षणों के आधार पर क्या बीपी की दवा बदलने की सोच रहे हैं या क्या आप अपने ब्लड शुगर की नियमित जांच करवा रहे।कुछ अन्य रक्तचाप की दवाएं, जैसे कि थायाज़ाइड मूत्रवर्धक और थायाज़ाइड-जैसे मूत्रवर्धक, भी ऐसा ही प्रभाव डाल सकती हैं। बीटा ब्लॉकर्स की तरह, हाइड्रोक्लोरोथियाज़ाइड (HCTZ) और मेटोलाज़ोन रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा सकते हैं। ये दवाएं मात्र 9 से 18 सप्ताह में टाइप 2 मधुमेह का कारण भी बन सकती हैं।बीटा ब्लॉकर्स ऐसी दवाएं हैं जो हृदय संबंधी समस्याओं, जैसे अनियमित हृदय गति और उच्च रक्तचाप का इलाज करती हैं
बीटा ब्लॉकर्स के उदाहरणों में शामिल हैं: एटेनोलोल,मेटोप्रोलोल,प्रोप्रानोलोल
ये बीटा ब्लॉकर्स मधुमेह रोगियों में रक्त शर्करा का स्तर बढ़ा सकते हैं और उन लोगों में टाइप 2 मधुमेह का कारण बन सकते हैं जिन्हें पहले यह बीमारी नहीं थी। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बीटा ब्लॉकर्स अग्न्याशय द्वारा उत्पादित इंसुलिन की मात्रा को कम कर देते हैं। लेकिन सभी बीटा ब्लॉकर्स ऐसा नहीं करते। कार्वेडिलोल (कोरेग) और नेबिवोलोल (बाइस्टोलिक) रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावित नहीं करते और न ही मधुमेह का

Related Articles

Back to top button