*गौ मांस खाने से कैंसर होता है अब तो विज्ञान ने भी पुष्टि कर दी है पारिवारिक हिस्ट्री वाले समय रहते त्यागे ,डॉ अर्चिता महाजन
*गौ मास में विटामिन बी 7 भरपूर होता है जोकि कैंसर सेल की खुराक है इलाज में देरी होगी ,ठीक होने के बाद दोबारा भी हो सकता है*

*गौ मांस खाने से कैंसर होता है अब तो विज्ञान ने भी पुष्टि कर दी है पारिवारिक हिस्ट्री वाले समय रहते त्यागे ,डॉ अर्चिता महाजन*
*गौ मास में विटामिन बी 7 भरपूर होता है जोकि कैंसर सेल की खुराक है इलाज में देरी होगी ,ठीक होने के बाद दोबारा भी हो सकता है*
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि कुछ लोग सेहत बनाने के चक्कर में गौ मांस खा लेते हैं। आज का आर्टिकल उन्हीं लोगों के लिए है। विज्ञान ने भी इसकी पुष्टि कर दी है कि को मास में बायोटीन यानी कि विटामिन बी7 भरपूर मात्रा में होता है और यही विटामिन कैंसर सेल की खुराक होती है।हालिया वैज्ञानिक शोधों के अनुसार यह कैंसर कोशिकाओं (ट्यूमर) को ऊर्जा देने और उन्हें जीवित रखने में मदद करता है। चिकित्सा वैज्ञानिक अब ट्यूमर को बढ़ने से रोकने के लिए कैंसर कोशिकाओं से विटामिन B7 की आपूर्ति काटने (उन्हें भूखा रखने) पर शोध कर रहे हैं।कैंसर और विटामिन B7 (बायोटिन) के बीच के संबंधों को समझने के लिए निम्नलिखित मुख्य बातों पर ध्यान देना जरूरी है:कैंसर कोशिकाओं के लिए विटामिन B7 का कामऊर्जा का बैकअप मार्ग: कैंसर कोशिकाएं बढ़ने के लिए ग्लूटामिन पर निर्भर होती हैं, लेकिन पोषण की कमी होने पर वे विटामिन B7 का उपयोग करके जीवित रहने का एक वैकल्पिक रास्ता ढूंढ लेती हैं।एंजाइम को सक्रिय करना: विटामिन B7 शरीर में ‘पायरुवेट कार्बोक्सिलेज’ नामक एंजाइम को सक्रिय करता है, जो कैंसर कोशिकाओं की ऊर्जा प्रक्रिया को जारी रखता है।वृद्धि रोकना: वैज्ञानिकों ने पाया है कि शरीर में विटामिन B7 की कमी करने से कैंसर कोशिकाओं का ऊर्जा उत्पादन बाधित हो जाता है, जिससे उनकी वृद्धि धीमी या पूरी तरह बंद हो सकती है।कैंसर मरीजों के लिए बायोटिन सप्लीमेंट के खतरेकैंसर के मरीज अक्सर कीमोथेरेपी के कारण बालों के झड़ने या नाखूनों की कमजोरी को ठीक करने के लिए खुद से बायोटिन (विटामिन B7) की खुराक लेना शुरू कर देते हैं, जिसके निम्नलिखित गंभीर नुकसान हो सकते हैं:रक्त परीक्षण में गड़बड़ी: ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी (The Ohio State University) के विशेषज्ञों के अनुसार, बायोटिन सप्लीमेंट खून की जांच रिपोर्ट (जैसे हार्मोन और कैंसर प्रोग्रेशन टेस्ट) को गलत तरीके से प्रभावित कर सकता है।कैंसर का दोबारा उभरना छिपना: यह रक्त में प्रोस्टेट-विशिष्ट एंटीजन (PSA) या थायराइड-उत्तेजक हार्मोन के स्तर को झूठा कम दिखा सकता है, जिससे डॉक्टर यह नहीं जान पाते कि कैंसर वापस आ रहा है या नहीं।इलाज में देरी: कुछ प्रजनन हार्मोन के स्तर को यह बढ़ा हुआ दिखा सकता है, जिससे कैंसर थेरेपी के फैसलों में देरी हो सकती है।हाल ही में लॉज़ेन विश्वविद्यालय (UNIL) के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, कैंसर कोशिकाएं अपनी वृद्धि के लिए ‘ग्लूटामिन’ नामक अमीनो एसिड पर निर्भर होती हैं। जब उन्हें ग्लूटामिन मिलना बंद हो जाता है, तो वे जीवित रहने के लिए एक वैकल्पिक रास्ता खोजती हैं। विटामिन B7 (बायोटिन) एक खास एंजाइम (पाइरुवेट कार्बॉक्सिलेज) को सक्रिय करता है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को वैकल्पिक ऊर्जा मिलती रहती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि शरीर में विटामिन B7 की कमी कर दी जाए या इसे ब्लॉक कर दिया जाए, तो कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को धीमा या पूरी तरह से रोका जा सकता है।2. मेडिकल टेस्ट (लैब रिपोर्ट्स) में गड़बड़ी का खतराकैंसर रोगियों के लिए बायोटिन सप्लीमेंट्स का सबसे बड़ा खतरा यह है कि यह रक्त परीक्षणों (Blood Tests) के परिणामों को गलत साबित कर सकता है।द ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, स्तन, डिम्बग्रंथि (ovarian), प्रोस्टेट और थायराइड कैंसर से जुड़े हार्मोन टेस्ट में बायोटिन हस्तक्षेप करता है।यह कैंसर के दोबारा लौटने (Cancer Recurrence) के संकेतों को छुपा सकता है, जिससे इलाज में देरी हो सकती है।यदि कोई मरीज बायोटिन ले रहा है, तो डॉक्टरों की सलाह होती है कि रक्त परीक्षण करवाने से कम से कम 72 घंटे पहले इसका सेवन पूरी तरह बंद कर देना चाहिए।



