ब्रेड सफेद हो या ब्राउन खाने का न हो जनून डॉ अर्चिता महाजन

*ब्रेड सफेद हो या ब्राउन खाने का न हो जनून डॉ अर्चिता महाजन
वॉइस ऑफ हिमाचल मीडिया ब्यूरो रिपोर्ट चंबा :- कमल देव
सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायर्नमेंट (सीएसई) के हाल के एक अध्ययन के अनुसार सभी तरह की ब्रेड (वाइट, ब्राउन, मल्टीग्रेन्स, होल वीट, पाव, बन्स और पिज्जा बेस) में कार्सिनोजन्स केमिकल्स होते हैं, जो कैंसर और थाइरॉयड रोगों का कारण बनते हैं। हमारे यहां बिकने वाली तमाम ब्रेड के 84 % नमूनों में पोटेशियम ब्रोमेट व पोटेशियम आयोडेट पाया जाता है। इन ऑक्सिडाइजिंग एजेंट्स पर कई देशों में प्रतिबंध लगा है। इनका उपयोग ब्रेड को फुलाने, मुलायम बनाने और अच्छी फिनिशिंग देने के लिए किया जाता है।
ब्रेड में इस्तेमाल होने वाले आटे के सभी पोषक तत्व और ऑयल निकालने के बाद ब्लीच किया जाता है। ताकि यह लंबे समय तक खराब हुए बिना चलता रहे।साथ ही इसमें पोटैशियम ब्रोमेट, एज़ोडिकार्बोनामाइड या क्लोरीन डाइऑक्साइड गैस जैसे रसायनों का भी उपयोग किया जाता है ताकि इसके प्राकृतिक पीले रंग को भी हटाया जा सके
ज्यादातर ब्रेड में बहुत अधिक मात्रा में नमक होता है. इससे शरीर में सोडियम की मात्रा के संतुलन पर असर पड़ता है.
इससे वजन बढ़ने की संभावना होती है। दरअसल इसमें रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्यादा होती है, जो शरीर में फैट के रूप में जमा हो जाता है, इसे खाने से आपका वजन बढ़ सकता है।सफेद ब्रेड को बनाने के लिए बहुत ज्यादा प्रोसेसिंग का इस्तेमाल किया जाता है। प्रोसेस्ड होने की वजह से सफेद ब्रेड शरीर में ब्लड शुगर लेवल को बढ़ाती है। डायबिटीज के मरीजों का ब्लड शुगर लेवल अगर बढ़ता है तो कई समस्याओं की वजह बन सकता है।
ऐसे ही ब्राउन ब्रेड या डार्क कलर की ब्रेड होने का मतलब यह नहीं होता है कि वह सच में अधिक पौष्टिक हो या होल व्हीट ब्रेड हो। सभी तरह की ब्राउन ब्रेड एक तरह से नहीं बनाई जाती। इसलिए अगर आप केवल रंग देख कर ब्रेड को हेल्दी मान रही हैं, तो यह आप एक भूल कर रही हैं। कुछ ब्रेड फैक्ट्री उसी तरह से ब्राउन ब्रेड बनाती हैं, जिस तरह से वे सफेद ब्रेड बनाती हैं। यानी उसमें भी मैदे का प्रयोग किया जाता है। जो आपकी सेहत के लिए बहुत हानिकारक होता है।
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रिशन डाइटिशन ट्रेंड योगा टीचर एंड होम्योपैथी फार्मासिस्ट नॉमिनेटेड फॉर नेशनल यूथ अवार्ड एंड पदम भूषण 9463819002



