इससे पहले की पूरा मुंह न खुले गुटका शोड़ दे डॉ अर्चिता महाजन

इससे पहले की पूरा मुंह न खुले गुटका शोड़ दे डॉ अर्चिता महाजन*
वॉइस ऑफ हिमाचल ब्यूरो रिपोर्ट सुंदरनगर :- मोहन हिमाचली
सेलिब्रिटीज द्वारा इसका प्रचार-प्रसार करने के बावजूद तंबाकू, पान मसाला या गुटखा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। तंबाकू और पान मसाले पर समय-समय पर रिसर्च होते रहते हैं, ताकि इससे होने वाले ओरल कैंसर के बारे में लोगों को पता चल सके। तंबाकू में निकोटिन होता है, जो मुंह के कैंसर का कारण बनता है। यह कार्सिनोजेनिक होता है। पान मसाले में मौजूद सुपारी में निकोटिन तो नहीं होता है, लेकिन इसमें नाइट्रोसामाइन मौजूद होता है, जो कार्सिनोजेनिक भी होता है
पान-मसाला, गुटखा खाने से मुंह खुलना धीरे-धीरे हो जाता है कम, सही वक्त पर इलाज एकमात्र उपाय पान मसाला गुटखा और सुपारी खाने से मुंह खुलना धीरे-धीरे कम हो जाता है। जिसके कारण डेंटल ट्रीटमेंट करने में समस्या आती है। अगर सही समय पर इस बीमारी का इलाज नहीं किया जाए तो यह बाद में ओरल कैंसर (मुख कैंसर) का रूप ले सकता है
आम तौर पर देखा गया है पान मसाला चबाने वालों को आए दिन मुंह में कोई न कोई समस्या बनी रहती है. अल्सर और माउथ कैंसर का शिकार भी ज्यादातर यही लोग होते हैं. ज्यादा समय तक पान मसाले चबाने वालों का मुह खुलना भी बंद हो जाता है या काफी कम खुलता है. लगातार पान मसाला और गुटखा खाने से फाइब्रोसिस होने की संभावना रहती है। इससे गाल की मांसपेशियां सख्त हो जाती हैं, मुंह पूरा नहीं खुलता। इसे कैंसर के लक्षण की शुरुआत भी कह सकते हैं। दवा खाने से धीरे-धीरे मांसपेशियां ढीली होने लगती हैं। तत्काल गुटखा खाना छोड़ दें।
तंबाकू में पाए जाने वाले निकोटिन से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, रक्त धमनियों में रुकावट आती है। रक्त में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे हार्ट प्रभावित होता है। तंबाकू चबाने से दांतों की जड़ों में गम भर जाता है, जिससे केविटी जमा होती है। सामान्य व्यक्ति की तुलना में गुटखा खाने वालों में ओरल कैंसर की संभावना 50 गुना ज्यादा रहती है
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रिशन डाइटिशन ट्रेंड योगा टीचर एंड होम्योपैथी फार्मासिस्ट नॉमिनेटेड फॉर नेशनल यूथ अवार्ड एंड पदम भूषण



