सुंदरनगर जंगम बाग मंदिर द्वारा भगवान श्री जगन्नाथ जी की भव्य रथ यात्रा निकाली गई

सुंदरनगर जंगम बाग मंदिर द्वारा श्री जगन्नाथ जी की भव्य रथ यात्रा निकाली गई

वॉइस ऑफ हिमाचल मीडिया एवं कला मंच ब्यूरो रिपोर्ट सुंदरनगर मोहन हिमाचली 20 जून 2023 सुंदरनगर जंगम बाग मंदिर स्वागत कर्ता कमेटी द्वारा श्री भगवान जगन्नाथ जी की भव्य रथ यात्रा निकाली गई आपको बता दें या यात्रा जवाहर पार्क से प्रारंभ होती हुई जंगम बाग मंदिर के परिसर में भगवान श्री जगन्नाथ जी का रथ को पंहुचाया गया स्वागत करता कमेटी के वरिष्ठ मेंबर महि राम जी ने बताया कि मंदिर का जीर्णोद्धार सुकेत रियासत के राजा श्याम सेन द्वारा करवाया गया महि राम जी ने बताया कि हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, आषाढ़ के शुक्ल पक्ष की द्वितीय तिथि को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपनी मौसी के घर जाते हैं.
रथ यात्रा पुरी के जगन्नाथ मंदिर से तीन दिव्य रथों पर निकाली जाती हैं. सबसे आगे बलभद्र का रथ, उनके पीछे बहन सुभद्रा और सबसे पीछे जगन्नाथ का रथ होता है. इस साल जगन्नाथ यात्रा 20 जून से शुरू हुई और इसका समापन 1 जुलाई को होगा. जानकारी देते हुए महि राम जी ने बताया कि भगवान् श्री जगन्नाथ जी की रथ यात्रा के उपलक्ष पर दिनाँक 22 जून को भव्य भंडारे का आयोजन जंगम बाग मंदिर परिसर में करवाया जा रहा है उन्होंने सभी भक्त प्रेमियों को भगवान् श्री जगन्नाथ जी के प्रसाद ग्रहण करने हेतु सादर आमंत्रित किया है
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जंगम भाग मंदिर जीर्णोद्धार के सम्बन्ध में
मन्दिर में एक शिलालेख के अनुसार इस परिसर का पहला जीर्णोद्धार राजा के एक वंशज मित्रा श्री शिव सिंह जी द्वारा सम्वत 1939 चैत्र शुक्ल नवमी (मार्च 1882) को पूर्ण करके भगवत अर्पण किया गया। मिला शिव सिंह जी परम् विरक्त जीवन बीताते हुए हरिद्वार में ब्रह्मलीन हुए ।
दूसरा जीर्णोद्धार
दूसरा जीर्णोद्धार स्थानीय प्रशासन, स्थानीय जनता तथा श्रद्धालुओं द्वारा मनोनीत एक कमेटी द्वारा ई.सन् 1993-2003 के मध्य करवाया गया। दान, अनुदान {{GRANT IN AID) तथा श्रमदान रूप में सब का भरपूर सहयोग मिला। इस सम्बन्ध में सबसे महत्व पूर्ण तथ्य यह है कि यदि सब का श्रमदान का सहयोग और स्थानीय मिस्त्री श्री साजु राम का अपने काम के प्रति कौशल और सम्र्पण का भाव कमेटी को न मिलता तो यह सब सम्भव न होता साजु राम जी ने इस सारे काम (सीमेंन्ट, पत्थर, लकड़ी आदि सब ) को कभी एक और कभी दो सहकर्मियों के साथ दस वर्ष के अथक परिश्रम से पूर्ण किया।



