*देर रात जागने से कमर का कमरा बनने में देर नहीं लगती ,डॉ अर्चिता महाजन* *
कम से कम 7 घंटे 19 मिनट की नींद बहुत जरूरी है

*देर रात जागने से कमर का कमरा बनने में देर नहीं लगती ,डॉ अर्चिता महाजन*
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डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि जब आप देर तक जागते हैं, तो आपके शरीर के भूख के हार्मोन (घ्रेलिन और लेप्टिन) प्रभावित होते हैं।घ्रेलिन- यह हार्मोन दिमाग को संकेत देता है कि आप भूखे हैं और नींद की कमी से इसका स्तर बढ़ जाता है।लेप्टिन- यह हार्मोन आपको बताता है कि आपका पेट भर गया है। देर रात तक जागने से इसका स्तर गिर जाता है, जिसके कारण आप अगले दिन न केवल ज्यादा भूख महसूस करते हैं, बल्कि आपका शरीर ‘फुल’ होने का संकेत भी देरी से देता है।’मिडनाइट स्नैकिंग’ का जाल रात 11 बजे के बाद जागने का सबसे बड़ा दुश्मन क्रेविंग्स है। दरअसल, रात के समय जागने वाले लोग अक्सर ज्यादा कैलोरी, मीठी और नमकीन चीजें, जैसे- चिप्स, बिस्कुट या नूडल्स की ओर आकर्षित होते हैं। इस समय खाई गई एक्स्ट्रा कैलोरी का इस्तेमाल शरीर एनर्जी के लिए इस्तेमाल नहीं करती, बल्कि फैट के रूप में जमा कर लेती है।मेटाबॉलिज्म का धीमा होना नींद की कमी आपके शरीर की इंसुलिन सेंसिटिविटी को कम कर देती है। जब आप पूरी नींद नहीं लेते, तो आपका शरीर ग्लूकोज को सही तरीके से प्रोसेस नहीं कर पाता। इससे ब्लड में शुगर का लेवल बढ़ता है और शरीर एक्स्ट्रा कैलोरी को फैट सेल्स में स्टोर करने लगता है, जिससे मेटाबॉलिज्म सुस्त पड़ जाता है।मोटापा बढ़ने के मुख्य कारण:हार्मोनल असंतुलन: अपर्याप्त नींद लेप्टिन (भूख कम करने वाला) और घ्रेलिन (भूख बढ़ाने वाला) के स्तर को बिगाड़ती है, जिससे आपको ज़्यादा भूख लगती है और पेट भरा हुआ महसूस नहीं होता.बढ़ी हुई भूख और लालसा: नींद की कमी से मस्तिष्क के वो हिस्से प्रभावित होते हैं जो खाने के आनंद और नियंत्रण के लिए ज़िम्मेदार हैं, जिससे मीठा और वसायुक्त भोजन खाने की इच्छा बढ़ती है.कम शारीरिक गतिविधि: थकान और सुस्ती के कारण व्यायाम करने की प्रेरणा कम होती है, जिससे कैलोरी बर्न कम होती है और शरीर में वसा जमा होती है.कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) का बढ़ना: देर रात तक जागने से कोर्टिसोल का स्तर बढ़ सकता है, जो पेट की चर्बी (पेट का मोटापा) से जुड़ा है।चयापचय (Metabolism) पर असर: नींद की कमी आपके शरीर के ऊर्जा संतुलन और चयापचय को प्रभावित करती है, जिससे कम कैलोरी बर्न होती हैं और वजन बढ़ता है. समाधान:प्रति रात 7-9 घंटे की गुणवत्तापूर्ण नींद लेने का लक्ष्य रखें.सोने और जागने का एक नियमित समय तय करें, भले ही वह सप्ताहांत हो.सोने से पहले स्क्रीन (फोन, लैपटॉप) के उपयोग से बचें.स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम के साथ-साथ पर्याप्त नींद लेना भी वजन प्रबंधन के लिए ज़रूरी है.



