कहीं यह विदेशी फूड कंपनियों और फार्मा कंपनियों की बहुत बड़ी साजिश तो नहीं,पहले फूड बेचो फिर दवाई।*
मोटे बच्चों की संख्या में भारत दूसरे नंबर पर कौन जिम्मेदार और कितना खतरनाक,? डॉ अर्चिता महाजन*

*मोटे बच्चों की संख्या में भारत दूसरे नंबर पर कौन जिम्मेदार और कितना खतरनाक,? डॉ अर्चिता महाजन* 
*कहीं यह विदेशी फूड कंपनियों और फार्मा कंपनियों की बहुत बड़ी साजिश तो नहीं,पहले
फूड बेचो फिर दवाई।*
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर मास्टर्स डिग्री इन फूड न्यूट्रिशन एंड डाइटिशियन होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित और हिमाचल सरकार द्वारा सम्मानित और लेफ्टिनेंट गवर्नर लद्दाख श्री कविंदर गुप्ता जी द्वारा सम्मानित ने बताया कि वर्ल्ड ओबेसिटी एटलस 2026′ की एक नई रिपोर्ट सामने आई है, जिसके आंकड़े हर माता-पिता को डराने वाले हैं। इस रिपोर्ट से पता चला कि बच्चों में बढ़ता वजन अब एक गंभीर बीमारी का रूप लेता जा रहा है।रिपोर्ट में पता चला कि ज्यादा वजन (High BMI) वाले बच्चों के मामले में भारत अब चीन के बाद दुनिया में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। हमारे यहां करीब 4.1 करोड़ बच्चों का वजन जरूरत से ज्यादा है, जिनमें से 1.4 करोड़ बच्चे गंभीर मोटापे का शिकार हैं।बच्चे मुख्य रूप से खराब खान-पान (जंक फूड, चीनी), शारीरिक गतिविधियों की कमी, स्क्रीन टाइम में वृद्धि, और आनुवंशिक कारणों से मोटे होते हैं। अस्वास्थ्यकर भोजन से कैलोरी का अधिक सेवन और कम व्यायाम से ऊर्जा का कम उपयोग मोटापे को बढ़ाता है। नींद की कमी और तनाव भी इसमें योगदान दे सकते हैं।बचपन में मोटापे के प्रमुख कारण:अस्वास्थ्यकर आहार (Unhealthy Diet): प्रोसेस्ड फूड, हाई-कैलोरी स्नैक्स, मीठे पेय और फास्ट फूड का अधिक सेवन।शारीरिक गतिविधियों की कमी (Lack of Exercise): बाहरी खेलों के बजाय फोन, टीवी या वीडियो गेम में ज्यादा समय बिताना।आनुवंशिकता (Genetics): अगर माता-पिता या परिवार में मोटापे का इतिहास है, तो बच्चों में भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।पर्यावरणीय कारक: स्वस्थ भोजन की कमी और कम आय वाले समुदाय में रहने से भी मोटापे का जोखिम बढ़ता है।पर्याप्त नींद न लेना: नींद की कमी से हार्मोनल असंतुलन हो सकता है, जो वजन बढ़ाता है। मोटापे को रोकने के लिए बच्चों को पौष्टिक भोजन देना, हरी सब्जियों और फलों का सेवन बढ़ाना और प्रतिदिन कम से कम 60 मिनट शारीरिक गतिविधियां (जैसे खेलना, दौड़ना) करना जरूरी है। विदेशी कंपनियों की साजिश होने का शक क्यों पड़ता है, कुछ फूड कंपनियां भारत के बच्चों को बचपन से ही जरूर से अधिक मीठा खिलाने की आदत डाल देती है यही फूड कंपनियां विदेश में अपना फूड कम मीठे में भेजती है और भारत में अधिकतम मीठा डालकर बच्चों को दिया जाता है। मैं किसी कंपनी का नाम नहीं ले रही हूं परंतु बहुत सी कंपनियां पर यह आरोप लग चुका है और कंपनियां माफी मांग चुकी हैं परंतु फिर भी भारत में बच्चों के बेबी फूड पर कोई सरकारी नियम ना होने के कारण धड़ाधड़ चीनी डालकर बेची जा रही है। जो बच्चे बचपन में जरूर से ज्यादा चीनी खाकर बड़े हुए होते हैं उनका चीनी के प्रति लगाव दिन प्रतिदिन बढ़ता जाता है। बेबी फूड में अत्यधिक चीनी खाने के कारण दिन प्रतिदिन बच्चों की चीनी के प्रति क्रेविंग बढ़ती जाती है। बस यही मोटापे का कारण बनती है। ऊपर से कोल्ड ड्रिंक की आदत। हम लोग भूल जाते हैं कि 2 लीटर बोतल में लगभग आधा किलो के बराबर चीनी होती है। और हमारे बच्चे दिन में 5 और सात पेट बोतल तो पी ही जाते हैं। हर हाल में यह मुझे तो विदेशी कंपनियों की चाल ही लगती है। पहले फूड बेचो फिर दवाई।



