सभी कारों का इंटीरियर जो TCEP रसायन से बना है गर्मियों में सांसों के साथ खून में जाकर कैंसर करता है डॉ अर्चिता महाजन*
TCEP में किडनी कैंसर, तंत्रिका तंत्र और किडनी और प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचाने की क्षमता है*

*सभी कारों का इंटीरियर जो TCEP रसायन से बना है गर्मियों में सांसों के साथ खून में जाकर कैंसर करता है डॉ अर्चिता महाजन*
*TCEP में किडनी कैंसर, तंत्रिका तंत्र और किडनी और प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचाने की क्षमता है*

*गाड़ी छांव में पार्किंग करें गर्मियों में चलते समय गाड़ी के शीशे बंद न करें*
डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित ने बताया कि कार के धुएं से कैंसर हो सकता है. यह आपको पता होगा. लेकिन, कार के इंटीरियर की वजह से भी आप कैंसर का शिकार हो सकते हैं, यह शायद नहीं पता हो. एक शोध में हाल ही में दावा किया गया है कार के अंदर TDCIPP और TCEP नाम के दो ऐसे कैमिकल का इस्तेमाल होता है, जो कैंसर फैला रहे हैं. इसे लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने केंद्र सरकार सहित तमाम पक्षों से जवाब मांगा है.TCEP एक ऑर्गेनोफॉस्फेट फ्लेम रिटार्डेंट केमिकल है जिसका इस्तेमाल कारों के सीट फोम, कवरिंग और अन्य इंटीरियर मटेरियल में किया जाता है. इसका मुख्य मकसद है कार में आग लगने की स्थिति में आग को फैलने से रोकना या उसकी गति को धीमा करना. 1970 के दशक से अमेरिका में नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) ने कारों में फ्लेम रिटार्डेंट्स के इस्तेमाल को अनिवार्य किया था और यही नियम भारत समेत कई देशों में भी लागू है. लेकिन हाल के शोध बताते हैं कि ये केमिकल्स, खासकर TCEP, उतने सुरक्षित नहीं हैं, जितना पहले समझा जाता था.EPA ने निर्धारित किया है कि TCEP मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का अनुचित जोखिम पैदा करता है। TCEP में किडनी कैंसर, तंत्रिका तंत्र और किडनी को नुकसान पहुंचाने और प्रजनन क्षमता को नुकसान पहुंचाने की क्षमता है।अमेरिकन कैमिकल सोसायटी के एन्वायरमेंटल साइंस एंड टेक्नोलॉजी जर्नल में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि ट्रिस 1-क्लोरो-इसोप्रोपाइल फॉस्फेट (TCIPP), थर्मोलिन 101, 2,4,6-ट्राइब्रोमोफेनॉल, ट्रिस (2-क्लोरोइथाइल) फॉस्फेट (TCEP) और डेकाब्रोमोडिफेनिल ईथर (बीडीई 209) जैसे एफआर का 99% कारों में इस्तेमाल होता है. खासतौर पर गर्मी के मौसम में इन कैमिकल्स के पार्टिकल सांस के साथ हमारे खून में घुलते हैं. इस तरह ये कैंसर का जोखिम बढ़ा देते हैं.



