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क्या है गेमिंग डिसऑर्डर ? क्यों है बच्चों को इसके बचाना जरुरी सिर्फ योग ही हल है,डॉ अर्चिता महाजन* *यदि आपका बच्चा चिड़चिड़ा और तनाव में है तो उसकी सबसे पहले स्क्रीन टाइम कम करें*

*क्या है गेमिंग डिसऑर्डर ? क्यों है बच्चों को इसके बचाना जरुरी सिर्फ योग ही हल है,डॉ अर्चिता महाजन*

*यदि आपका बच्चा चिड़चिड़ा और तनाव में है तो उसकी सबसे पहले स्क्रीन टाइम कम करें*

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित ने बताया कि यदि आप अपने बच्चों में यह व्यवहार देखते हैं तो तुरंत उसके दिनचर्या पर ध्यान दें।
1. गेमिंग के प्रति जुनूनी होना, तथा गेमिंग से दूर रहने पर दुखी, चिड़चिड़ा या चिंतित हो जाना।
2. वह अधिक से अधिक गेम खेलना चाहता है और इसे कम या बंद नहीं कर पाता।
3. अब उन्हें उन अन्य गतिविधियों में रुचि नहीं रही जिनमें वे पहले आनंद लेते थे।
4. वे झूठ बोलते हैं कि वे गेम खेलने में कितना समय बिताते हैं।
5. खराब मूड से राहत पाने के लिए गेमिंग का उपयोग करता है।
6. गैजेट्स चलाने या लगातार वीडियो गेम खेलने से बच्चों के दिमाग पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ता है. इससे सिर में दर्द और भारीपन बना रहता है. जिससे पैरेंट्स, फैमिली या फ्रेंड्स से बात करने में उन्हें चिड़चिड़ापन महसूस होने लगता है.
गेम्स की वजह से उनका मन किसी दूसरी चीज में नहीं लगता हैबच्चों में कभी काम की टेंशन, तो कभी स्कूल की पढ़ाई के प्रेशर के चलते स्ट्रेस का सामना करना पड़ सकता है। कई बार घर की तनावपूर्ण स्थिति भी बच्चों में स्ट्रेस और तनाव को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभा सकती है। फिलहाल इस उम्र में बच्चों का जीवन बेहद सरल होता है और ज्यादातर बच्चे अपने खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं। लेकिन, कुछ बच्चों को डिप्रेशन का सामना करना पड़ सकता है। इस स्थिति में बच्चा अक्सर अलग-थलग रहता है, और वह अपने दोस्तों के साथ भी समय बिताने से कतराता है। छोटी उम्र में डिप्रेशन होने पर बच्चे को उदासी, आत्म-विश्वास की कमी लंबे समय तक बनी रह सकती है। यह एक गंभीर मानसिक स्थिति होती है, जिसे यदि समय पर पहचाना या इलाज न किया जाए, तो इससे जुड़ी परेशानियां हो सकती है।अध्ययनों से पता चलता है कि वीडियो गेम खेलने से नींद खराब हो सकती है और ध्यान, शैक्षणिक प्रदर्शन, मनोदशा और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। हिंसक वीडियो गेम के संपर्क में आने से बच्चों में आक्रामक व्यवहार हो सकता है। लंबे समय तक वीडियो गेम खेलने से मोटापा बढ़ने का भी खतरा है।

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