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कोल्ड ड्रिंक की जगह नारियल पानी पीना अच्छा है परंतु पानी की जगह नारियल पानी पीना गलत है डॉ अर्चिता महाजन*

पोटेशियम के स्तर में बढ़ोतरी से पैरालिसिस का खतरा बढ़ सकता है.*

*कोल्ड ड्रिंक की जगह नारियल पानी पीना अच्छा है परंतु पानी की जगह नारियल पानी पीना गलत है डॉ अर्चिता महाजन*

*पोटेशियम के स्तर में बढ़ोतरी से पैरालिसिस का खतरा बढ़ सकता है.*

डॉ अर्चिता महाजन न्यूट्रीशन डाइटिशियन एवं चाइल्ड केयर होम्योपैथिक फार्मासिस्ट एवं ट्रेंड योगा टीचर नॉमिनेटेड फॉर पद्म भूषण राष्ट्रीय पुरस्कार और पंजाब सरकार द्वारा सम्मानित ने बताया कि नारियल पानी में मौजूद मिठास प्राकृतिक होती है, जो मुख्य रूप से ग्लूकोज और फ्रक्टोज जैसे शुगर तत्वों से आती है. एक मध्यम आकार के हरे नारियल में लगभग 200-250 मि.ली. पानी होता है, जिसमें लगभग 5-6 ग्राम नेचुरल शुगर हो सकती है. यह मात्रा बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन यह पूरी तरह जीरो भी नहीं है. ऐसे में इसका संतुलित मात्रा में सेवन करना सही होता है. नारियल पानी में शुगर की मात्रा कम होती है और यह एक लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (Low Glycemic Index) वाला ड्रिंक है. इसका मतलब यह है कि यह धीरे-धीरे ब्लड शुगर को बढ़ाता है, जिससे अचानक ब्लड शुगर स्पाइक होने का खतरा कम रहता है.
हालांकि, डायबिटीज के मरीजों के लिए यह जरूरी है कि वे हर प्रकार की मिठास पर नजर रखें. यदि कोई व्यक्ति एक दिन में कई बार या अत्यधिक मात्रा में नारियल पानी पीता है, तो यह उसकी ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकता है, खासकर अगर वह पहले से ही अनियंत्रित हो.नारियल का पानी ‘लो ब्लड प्रेशर’ का कारण बन सकता है. क्योंकि इसमें पोटैशियम काफी अच्छी मात्रा में पाया जाता है. यही वजह है कि इसे रोजाना पीने से ब्लड प्रेशर अचानक कम हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो आपकी सेहत के लिए ये बिल्कुल सही साबित नहीं होगा.बहुत ज्यादा नारियल पानी पीने से नुकसान हो सकता है. नारियल पानी में मूत्रवर्धक गुण पाए जाते हैं. इसका तात्पर्य ये है कि इसके बहुत ज्यादा सेवन से टॉयलेट में कई बार जाना पड़ सकता है. हालांकि थोड़ी मात्रा में नारियल पानी के मॉइस्चराइजिंग लाभ होते हैं, लेकिन इसका ज्यादा मात्रा में सेवन हानिकारक हो सकता हैनारियल पानी में पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है, जो केले से भी ज़्यादा हो सकता है. एक कप नारियल पानी में लगभग 600 मिलीग्राम पोटेशियम होता है. .बहुत ज़्यादा पोटेशियम से लकवा या पैरालिसिस हो सकता है, जिसे हाइपरकेलेमिक पीरियोडिक पैरालिसिस कहते हैं. यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें रक्त में पोटेशियम का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी और कभी-कभी लकवा के एपिसोड हो सकते हैं

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