ऑपरेशन सिंदूर का एक ही सबक भविष्य की लड़ाइयां आर्मी बेस्ड नहीं टेक्नोलॉजी बेस्ड होंगी
भारत ने युद्ध सिर्फ पाकिस्तान से नहीं तुर्की चीन और अमेरिका के साथ भी लड़ा

iभारत-पाक के संघर्ष ने साफ कर दिया है कि आने वाले समय की लड़ाई पुराने युद्धों से अलग होंगे। एक लंबे समय तक दो पड़ोसी देशों की लड़ाई को सरहद के संघर्ष की तरह देखा जाता था लेकिन अब बॉर्डर की अहमियत घट गई है। साफ है कि आने वाले समय में बॉर्डर से सैकड़ों किमी दूर से ही हवा में लड़ाई लड़ी जाएंगी। इस छोटी सी लड़ाई में भारत ने विदेशी हथियारों के साथ-साथ अपने देसी हथियार भी टेस्ट किया। जिस ड्रोन शक्ति को यूक्रेन रूस नहीं मात दे पाए उनको भारत की डिफेंस ने बहुत अच्छे से हैंडल किया। रूस द्वारा दिया गया एस400 बेशक बहुत मददगार रहा। परंतु उसके साथ-साथ कहीं पर देसी डिफेंस भी भारत ने अजमा लिए। अब भविष्य में यह मानकर चलो की कोई भी छोटा-मोटा युद्ध बॉर्डर पर नहीं लड़ा जाएगा। बल्कि अब सैकड़ो किलोमीटर दूर से ही हवा में ही वार पटवार होंगे।चीन की मिसाइलें- HQ9, HQ16 और PL-15 और लड़ाकू विमान- J-10 और JF-17 पहली बार लड़ाई में इस्तेमाल किए गए। चीन के हवाई सुरक्षा (AD) सिस्टम को भी पहली बार परखा गया। सूत्रों के हवाले से खबर है अमेरिका के जहाज की कॉपी तैयार करके चीन ने जो पाकिस्तान को जहाज बेचे थे उन कंपनियों के शेयरों का भाव काफी गिर गया है। चीन द्वारा भेजा गया डिफेंस सिस्टम भी पाकिस्तान में फेल हो गया। तुर्की के ड्रोन फेल हो गए।



